आगामी छठ पूजा त्योहार के मद्देनजर क्षेत्र के विभिन्न गंगा घाटों पर घाट की सफाई और सुरक्षित तरीके से छठ पूजा के आयोजन की तैयारी तीव्र गति से शुरु हो गई है। छठ पूजा समितियों के दर्जनों स्वयंसेवक अपने काम धंधे से खाली होकर, शाम को 2 से 3 घंटे घाटों पर श्रमदान करने लगे हैं। बाढ़ के दौरान घाटों पर जमा मिट्टी को हटाने का काम तेजी से चल रहा है।
दर्जनों स्वयंसेवक कर रहे हैं श्रमदान
गौरतलब है कि वर्षों बाद इस बार गंगा नदी में दोबारा बाढ़ आने के कारण नदी के किनारे लगभग सभी घाटों का ज्यादातर हिस्सा अभी पानी में ही डूबा हुआ है। जिसके कारण घाटों पर इस बार छठ की तैयारी में लगी समितियों के सामने समस्या खड़ी हो गई है। इस कारण घाट के अगल-बगल के मिट्टी की सफाई कर छठ पूजा में घाट पर आने वाली भीड़ के लिए जगह बनाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। बाढ़ की जमा मिट्टी से बने ऊंचे टीलों की मिट्टी को काटकर, जमीन को समतल करने का काम समितियों के स्वयंसेवक कर रहे हैं।
पूजा समितियों के लिए गंगा नदी की बाढ़ बनी चुनौती
मां गंगा सेवा संघ समिति के अध्यक्ष दिनेश कुशवाहा ने बताया कि आगामी 29 और 30 अक्टूबर को घाट पर छठ पूजा का त्योहार मनाया जाएगा। लेकिन बाढ़ का पानी ज्यादा होने के कारण घाट पर पानी की गहराई को देखते हुए, सुरक्षित तरीके से छठ पूजा आयोजन की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
घट रहा जलस्तर
हालांकि अभी पानी एक से डेढ़ फुट प्रति 24 घंटे की रफ्तार से घट रहा है। लेकिन छठ पूजा के दिन अगर यह पानी सुरक्षित स्थान पर जाकर नहीं ठहता, तो उसके लिए नदी में रस्सी के साथ-साथ नदी के बाहर लंबी नाली का निर्माण कर उसमें गंगा नदी का जल प्रवाहित करने पर विचार किया जा रहा है। ताकि महिलाएं नदी के बाहर ही उसमें खड़ी होकर सुरक्षित तरीके से छठ पूजा कर सकें।